OPEC प्लस Crude Oil के उत्पादन में 3 प्रतिशत की कमी कर सकता है, बढ़ेंगे कच्चे तेल के दाम

Crude Oil: कच्चे तेल उत्पादक देशों का समूह ओपेक+ क्रूड ऑयल (Crude Oil) के उत्पादन में 3 प्रतिशत या 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन (10 लाख बैरल) से अधिक की कटौती कर सकता है. पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और रूस सहित अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देशों का गठबंधन बुधवार को मिलने वाला है और प्रति दिन 1 मिलियन बैरल से अधिक उत्पादन कटौती पर चर्चा करने की संभावना है.

फिर बढ़ेंगे Crude Oil के दाम

अधिकारिक मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, डॉलर के मजबूत होने के कारण भी कच्चे तेल की कीमत प्रभावित हुई है. हालांकि तेल (Crude Oil) के उत्पादन में कटौती पर फैसला मंत्रियों की बैठक के बाद ही लिया जाएगा.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का औसत कच्चे तेल का आयात मूल्य सितंबर में लगभग 22 प्रतिशत घटकर 90.71 डॉलर प्रति बैरल हो गया. जो जून में 116.01 डॉलर के अपने चरम पर था. उत्पाद की कीमतों में और भी भारी गिरावट आई है.

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) सहित राज्य द्वारा संचालित OMC पेट्रोल की बिक्री पर लगभग 3-4 रुपये प्रति लीटर मार्जिन कमा रही हैं. लेकिन डीजल में लाभ है अभी भी नेग्लिजिबल है.

जून से लगातार चार महीनों के लिए तेल की कीमतों में गिरावट आई है. ओपेक + के सूत्रों ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) और उसके सहयोगी जिसे सामूहिक रूप से ओपेक + के रूप में जाना जाता है. उसने बुधवार की बैठक से पहले एक मिलियन बीपीडी (BPD) से अधिक के उत्पादन में कटौती पर विचार कर रहा है.

रूस- यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में थी इतनी कीमत

बीओके फाइनेंशियल में ट्रेडिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डेनिस किस्लर ने कहा, ज्यादातर व्यापारी लगभग 50,000 बीपीडी (BPD) की कटौती की उम्मीद कर रहे है. अगर सहमति हुई, तो पिछले महीने उत्पादन में 100,000 बीपीडी की कमी करने के बाद यह समूह की लगातार दूसरी मासिक कटौती होगी. रूस- यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी. लेकिन अब यह घटकर 87 डॉलर के आसपास आ गई है.

ओपेक + जुलाई में अपने उत्पादन लक्ष्यों से लगभग तीन मिलियन बीपीडी से चूक गया. बता दें की, भारत वर्तमान में कच्चे तेल का 85 प्रतिशत आयात करता है. जो इसे संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बनाता है.

बीते दिनों भारत के तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तेल की कीमतों को लेकर अपने अधिकारिक बयान में कहा था की, “जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अधिक थीं. तो हम सस्ती दरों में ईंधन मुहैया करा रहे थे.” भारत के सितंबर में रूसी तेल का आयात अगस्त से दो महीने तक गिरने के बाद 18.5 फीसदी बढ़ गया है.

जानकारों का मानना है की,  रूस-यूक्रेन के युद्ध के चलते भी तेल की कीमतों में असर पड़ा है. चीन की डूबती अर्थव्यस्था के चलते भी तेल की कीमतों पर असर पड़ा है. बता दें की, तेल की कीमतों को लेकर बैठक चल रही है. जल्दी ही जो भी फैसला होगा वो सभी देशों के साथ साझा किया जाएगा.

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