September 29, 2022
CPEC: पाकिस्तान और चीन द्वारा दिए गए निमंत्रण पर भारत ने व्यक्त की चिंता

CPEC: पाकिस्तान और चीन द्वारा दिए गए निमंत्रण पर भारत ने व्यक्त की चिंता

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CPEC: भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) से होकर गुजर रहे अरबों डॉलर के आर्थिक गलियारे संबंधी परियोजनाओं में अन्य देशों को जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश को लेकर मंगलवार को भारत ने चीन और पाकिस्तान की कड़ी निंदा की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इस पर अभी कड़ी निंदा की है.

क्या कहा अरिंदम बागची ने

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने चीन और पाकिस्तान की कड़ी निंदा की है. दरअसल, भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) से होकर गुजर रहे अरबों डॉलर के आर्थिक गलियारे संबंधी परियोजनाओं में और कई देशों को शामिल करने की खिलाफ़त की है. अरिंदम बागची का कहना है की,

“हमने तथाकथित सीपीईसी परियोजनाओं में तीसरे देशों की प्रस्तावित भागीदारी को प्रोत्साहित करने की रिपोर्ट देखी है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत इस प्रकार की गतिविधियां ‘स्वाभाविक रूप से अवैध, अनुचित और अस्वीकार्य’ हैं.”

सीपीईसी के अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं समन्वय संबंधी संयुक्त कार्य समूह की डिजिटल माध्यम से तीसरी बैठक शुक्रवार को हुई थी. भारत की प्रतिक्रिया अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और समन्वय पर (CPEC) संयुक्त कार्य समूह (JWG) की तीसरी बैठक के कुछ दिनों बाद आई है. चीन और पाकिस्तान की इस दिलचस्पी पर भारत का रुक साफ़ है और भारत इस कदम की लगातार निंदा कर रहा है.

पाकिस्तान विदेश कार्यालय से आया ये बयान

बता दें की, पाकिस्तान विदेश कार्यालय के बयान में कहा गया है, “एक खुले और समावेशी मंच के रूप में, दोनों पक्षों ने सीपीईसी द्वारा खोले गए पारस्परिक रूप से लाभप्रद सहयोग के लिए इच्छुक तीसरे पक्षों का स्वागत किया.” बताया जा रहा है की ये प्रोजेक्ट, सीपीईसी (CPEC) परिवहन और ऊर्जा परियोजनाओं का एक संयोजन है. जो मुख्य रूप से पाकिस्तान के ग्वादर से शिनजियांग के चीनी क्षेत्र में काशगर तक एक आर्थिक गलियारे पर केंद्रित है.

सीपीईसी चीन की महत्वकांक्षी ‘बेल्ड एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) का हिस्सा है. और भारत हमेशा से ही ‘बेल्ड एंड रोड इनिशिएटिव’ का विरोधी रहा है. वैसे तो अब चीन सीपीईसी का बचाव करते हुए कह रहा है कि यह एक आर्थिक परियोजना है. जिसका लक्ष्य किसी तीसरे देश को नहीं है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची का कहना है की, “भारत तथाकथित सीपीईसी में परियोजनाओं का दृढ़ता से और लगातार विरोध करता है> जो कि भारतीय क्षेत्र में हैं. जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है.” बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, मूल रूप से $47 बिलियन का मूल्य CPEC परियोजनाओं का है. लेकिन 2020 तक इसका मूल्य $62 बिलियन हो गया है.

यह देश कर सकतें हैं निवेश

16 जनवरी को ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है की, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और जर्मनी बोर्ड में निवेश कर सकते हैं. लेकिन चीन इस बात से साफ़ इनकार कर रहा है. अधिकारिक जानकारी में ये संकेत दिए गए हैं की, यह खुलासा नहीं किया गया है कि परियोजना में कौन निवेश कर सकता है.  हालाँकि, भारत ने यह बात साफ़ कही है की चीन और पाकिस्तान यह हरकत बिलकुल भी मानवीय नहीं है.

जानकारी के लिए बता दें की, चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर या सीपीईसी चीन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन जैसे विवादित इलाकों से होकर गुजरता है. जिसका भारत ने हमेशा से विरोध किया है.

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