बलूचिस्तान के केचू में CPEC परियोजनाओं की रखवाली कर रहे पाकिस्तानी बलों पर हुआ हमला

CPEC: मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बलूचिस्तान के केच जिले में हुए हमले में चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सुरक्षा कर रहे पाकिस्तानी बलों को निशाना बनाया गया है. बलों पर हमला आज सुबह केच में कोलवाह के अशल इलाके में हुआ. बलूचिस्तान पोस्ट ने बताया कि अधिकारी सीपीईसी (CPEC) मार्ग पर थे. जब हथियारबंद लोगों ने उन पर हमला किया.

सुरक्षाबलों को हुआ जान-माल का नुकसान

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, मीडिया पोर्टल ने क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से कहा कि सुरक्षाबलों को जान-माल का नुकसान हुआ है. जबकि हमलावर मौके से फरार हो गए. अधिक पाकिस्तानी सुरक्षा बल इलाके में पहुंच गए हैं और हमलावरों की तलाश जारी है.

अभी तक किसी ने भी हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, अतीत में बलूच अलगाववादी इस प्रकार के हमले की जिम्मेदारी लेते रहे हैं. इन बलूच अलगाववादियों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को शोषणकारी परियोजना करार दिया है इसके अलावा, बलूचिस्तान में अन्य परियोजनाओं को भी हमलों में निशाना बनाया गया है.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता जयंद बलूच ने एक बयान में पाकिस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (पीपीएल) को बलूच संसाधनों का दोहन रोकने और बलूचिस्तान छोड़ने की चेतावनी दी. बलूच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष नसीम बलूच ने कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तानी अत्याचारों और पर्यावरणीय तबाही दोनों का सामना कर रहा है.

जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभाव आज वैश्विक मुद्दा बन गए हैं

बता दें की, जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभाव आज की दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दा बन गए हैं. इस वजह से, पर्यावरण वैज्ञानिक तापमान वृद्धि, सूखा, बाढ़ और अन्य प्रभावों के प्रभावों पर शोध कर रहे हैं और उनके प्रभावों से बचने के उपाय खोज रहे हैं.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता जयंद बलूच ने आगे कहा की, प्राकृतिक कारकों के अलावा कोयले, तेल और गैस के उपयोग और आवश्यकता ने पर्यावरण को प्रदूषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. औद्योगिक क्रांति के बाद से वैश्विक तापमान में काफी वृद्धि हुई है और पिछले दस वर्षों में विशेष रूप से उच्च रहा है.  इस वर्ष कई देशों में रिकॉर्ड तापमान के साथ टुटा है.

बलूचिस्तान में भीषण गर्मी और हाल ही में आई बाढ़ भी उसी जलवायु परिवर्तन के कारण हैं. एक अधिकृत देश होने के कारण, कब्जाधारियों ने इन प्रभावों से बचने के लिए कभी उपाय नहीं किए. बल्कि बलूचिस्तान को इसे तीव्र करने के लिए एक परमाणु परीक्षण स्थल बना दिया.

पहला परीक्षण 24 साल पहले हुआ था

पहला परीक्षण 24 साल पहले परमाणु विस्फोट के रूप में किया गया था. इसके अलावा बलूचिस्तान को पाकिस्तान की बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी चुना गया था. हबको और यूसीएच पावर प्लांट इसके उदाहरण हैं.

ये दोनों परियोजनाएं बलूचिस्तान में हैं. लेकिन इनका उत्पादन और लाभ पाकिस्तान उठा रहा है.ये परियोजनाएं ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक हैं. नसीम बलूच का कहना है की,

“ग्रीनहाउस गैसों का पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. वे तापमान में वृद्धि करके जलवायु परिवर्तन का कारण बनते हैं  और वे धुंध और वायु प्रदूषण से श्वसन रोग भी पैदा करते हैं. ग्रीनहाउस गैसों के कारण जलवायु परिवर्तन के अन्य प्रभाव अत्यधिक गर्म मौसम और जंगल की आग में वृद्धि हैं.”

बीएनएम के अध्यक्ष ने कहा कि बलूच राष्ट्र कब्जे के उत्पीड़न, पर्यावरण परिवर्तन के प्रभाव, गरीबी और पिछड़ेपन के कारण इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. हालांकि, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में बारिश ने कहर बरपाया है और वहां की सरकारें भले ही अपने लोगों के लिए कुछ कर पाएं लेकिन बलूचिस्तान में हालात कुछ और हैं.

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