विश्व बैंक ने China में आई मंदी के कारण कहा की, इस साल Asia की ग्रोथ होगी धीमी

China: विश्व बैंक ने एशिया-प्रशांत के लिए अपने आर्थिक दृष्टिकोण को घटा दिया है. चीन (China) की जीरो कोविड नीती ने चीन की अर्थव्यस्था को पूरी तरह से तबाह कर दिया है. बता दें की, की विश्व बैंक का मानना है की चीन अर्थव्यस्था न सिर्फ एशिया के लिए बल्कि पुरे विश्व  के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए हमको चीन में बिगड़ते हालातों को अन देखा नहीं करना चाहिए.

पूरे विश्व के लिए China की अर्थव्यस्था है महत्वपूर्ण

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, वाशिंगटन स्थित वित्तीय संस्थान ने मंगलवार को कहा कि एशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं के 2022 में 3.2 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है. जो अप्रैल में 5 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कम है. बैंक के अनुसार, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के इस साल 2.8 प्रतिशत और 2023 में 4.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है. ऋणदाता (lender) ने पहले भविष्यवाणी की थी कि चीन 2022 में 5 प्रतिशत बढ़ेगा.

एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank) ने पिछले हफ्ते एशियाई देश की अर्थव्यवस्थाओं के लिए अपने विकास दृष्टिकोण को 5.2 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत कर दिया था. घटती हुई अर्थव्यस्था के विश्व बैंक ने कई कारण बताए हैं. और कहा है की 2023 तक अर्थव्यस्था में कुछ खास सुधार नहीं आएगा.

चीन (China) की जीरो कोविड नीती ने सिर्फ चीन पर ही नहीं बल्कि पुरे एशिया पर प्रभाव डाला है. चीन में कोरोना के चलते कई कारखाने बंद रहे. जिससे लोगो को रोज़गार मिलने का जरिया भी बाधित हुआ. हालाँकि, अर्थव्यस्था के जानकारों ने चीन को चेताया था. उन्होंने कहा की चीन की जीरो कोविड नीती आने वाले समय में सबके लिए घातक होने वाली है.

रियल स्‍टेट सेक्‍टर हुआ बरी तरह प्रभावित

अधिकारिक मीडिया के हवाले से आई एक खबर के अनुसार, चीन में जीरो कोविड पालिसी वजह से कई छोटी इकाइयां और रियल स्‍टेट सेक्‍टर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. चीन की अर्थव्‍यवस्‍था के पटरी से उतरने की वजह कोरोना तो है ही साथ ही इसकी एक बड़ी वजह वहां की जीरो कोविड पालिसी भी है.

वैसे तो जानकारों की राय में चीन कोरोना महामारी को लेकर बनाई चीन की नीति अब उस पर उलटी साबित हुई है. बता दें की, अप्रैल-जून की अवधि के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में केवल 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुए है.  बताया जा रहा है की, विश्व बैंक ने केंद्रीय बैंकों द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए जोखिम (Risk) के रूप में बढ़ती मुद्रास्फीति (inflation) को कम करने की कोशिश करने के लिए  ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है.

रूस-यूक्रेन युद्ध का भी पड़ा है बड़ा प्रभाव

रूस-यूक्रेन के युद्ध (Russia-Ukraine War) ने भी पूरी दुनिया पर असर डाला है. कही पेट्रोल डीजल के दामों में इजाफा हुआ है तो कही लोग खाने को ही तरस गए हैं. एशियाई देशों की अगर बात करें तो श्रीलंका,पाकिस्तान जैसे देश पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं.

श्रीलंका (Srilanka) में बीते समय ऐसा हाल हो गया था की लोगो के पास सिर्फ एक वक़्त का खाना बचा था. बिजली न होने के कारण स्कूल, दफ्तरों पर ताला लटक रहा है. उधर पाकिस्तान भी मुसीबत का सामना कर रहा है.

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