Beirut port blast: दो साल बीतने के बाद भी लेबनान कर रहा न्याय की प्रतीक्षा

Beirut port blast: बेरूत में 4 अगस्त 2020 को वो भीषण विस्फोट बन्दरगाह (Beirut port blast) के एक गोदाम में बड़ी मात्रा में रखे गए अमोनियम नाइट्रेट के ज़रिये हुआ था और उसमें 200 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. बता दें की, दो साल बाद, मानवाधिकार विशेषज्ञ 2020 बेरूत विस्फोट की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग कर रहे हैं.

विस्फोट में हुआ इतना नुकसान

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, विशेषज्ञों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय, मानवाधिकार के उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि विस्फोट में 77, 000 अपार्टमेंट नष्ट हो गए. 7,000 लोग घायल हो गए, 300,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए. जिनमें से कम से कम 80,000 बच्चे थे.

विशेषज्ञों का कहना है की, “इस त्रासदी ने हाल की स्मृति में सबसे बड़े गैर-परमाणु विस्फोटों में से एक को चिह्नित किया, फिर भी दुनिया ने यह पता लगाने के लिए कुछ नहीं किया कि ऐसा क्यों हुआ.”

आगे उन्होंने कहा है की, “विस्फोट की दूसरी बरसी पर, हम निराश हैं कि लेबनान में लोग अभी भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं, और हम बिना किसी देरी के एक अंतरराष्ट्रीय जांच शुरू करने का आह्वान करते हैं.”

संयुक्त राष्ट्र के 37 मानवाधिकार विशेषज्ञों ने जारी किए थे अपने बयान

जानकारी के लिए बता दें की, 2020 के विस्फोट (Beirut port blast) के तुरंत बाद, संयुक्त राष्ट्र के 37 मानवाधिकार विशेषज्ञों ने एक संयुक्त बयान जारी कर लेबनानी सरकार और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से न्याय और बहाली के आह्वान का प्रभावी ढंग से जवाब देने का आह्वान किया था.

आगे विशेषज्ञों ने कहा की, “राष्ट्रीय जांच प्रक्रिया को कई बार बाधित किया गया है. इसलिए पीड़ितों के परिवारों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवाधिकार परिषद के तहत एक स्वतंत्र जांच स्थापित करने की अपील की है. उम्मीद है कि यह जवाब देगा कि लेबनान के अधिकारी प्रदान करने में विफल रहे हैं.”

विशेषज्ञों ने नोट किया कि विस्फोट और उसके बाद ने लेबनान में लापरवाह शासन और व्यापक भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी हुई है. हाल ही में लेबनान का दौरा करने वाले अधिकार विशेषज्ञों ने पाया कि विस्फोट के लिए जिम्मेदारी अभी तक स्थापित नहीं हुई है. प्रभावित क्षेत्र खंडहर में हैं और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से पुनर्निर्माण धन मुश्किल से सही लाभार्थियों तक पहुंचना शुरू हो गया है.

विस्फोट से अनाज साइलो को पहुंचा था नुकसान

अधिकारिक जानकारी की माने तो, संकटग्रस्त लेबनान में भोजन और अन्य संसाधनों तक पहुंच गंभीर खतरे में है। लेबनान अपने भोजन का 80 प्रतिशत तक आयात करता है. और विस्फोट ने देश के मुख्य प्रवेश बिंदु और अनाज साइलो को क्षतिग्रस्त कर दिया था.

लेबनान में लोग ईंधन, बिजली, दवा और स्वच्छ पानी तक पहुँचने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं. विशेषज्ञों ने नोट किया कि मुद्रा पिछले दो वर्षों में अपने मूल्य का 95 प्रतिशत से अधिक खो चुकी है. और जून में औसत मुद्रास्फीति दर लगभग 210 प्रतिशत थी.

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कुछ देशों ने विस्फोट के बाद लेबनान में लोगों की सहायता करने का वादा किया है. लेकिन अभी तक न्याय देने और अंतरराष्ट्रीय जांच शुरू करने के लिए कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही है. लेबनान के लोग आज भी उन सभी मुसीबतों का सामना कर रहें हैं.

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