September 25, 2022
चीनी सैनिकों ने 4 जून 1989 को तियानमेन चौक (Tiananmen Massacre) पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियों और टैंक चला दिया था

चीनी सैनिकों ने 4 जून 1989 को तियानमेन चौक (Tiananmen Massacre) पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियों और टैंक चला दिया था

चीनी सैनिकों ने 4 जून 1989 को तियानमेन चौक पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियों और टैंक चला दिया था , जिसमें बहुत से लोगों की मौत हो गई थी।
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संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि 4 जून, 1989 को बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर (Tiananmen Massacre) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर की गयी हिंसक कार्रवाई को “कभी नहीं भुलाया जाएगा” | ये बातें अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट (US Secretary of State) एंटनी ब्लिंकन ने तियानमेन नरसंहार (Tiananmen Massacre) की 33वीं वर्षगांठ पर कही|

दरअसल चीन ने थियानमेन स्क्वायर से इस आंदोलन से जुडी एक ‘लोकतंत्र की प्रतिमा’ को हटा दिया है। उन्होंने आगे कहा चीन इतिहास को मिटाने की कोशिश और मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है |

हालाँकि चीन ने आज तक यह खुलासा नहीं किया है कि लोकतांत्रिक सुधारों का आह्वान करने वाले प्रदर्शनकारियों के तियानमेन चौक को खाली करने के लिए सेना द्वारा गोला बारूद का इस्तेमाल करने पर कितने लोग मारे गए थे।

Tiananmen Massacre पर क्या कहा ?

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इस (Tiananmen Massacre) नरसंहार के 33 साल पूरे होने पर एक बयान में कहा, “इन बहादुर व्यक्तियों के प्रयासों को भुलाया नहीं जाएगा।” “हर साल, हम उन लोगों का सम्मान करते हैं और उन्हें याद करते हैं जो मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के लिए खड़े हुए थे जबकि कई अब अपनी बात कहने में सक्षम नहीं हैं, हम और हमारी तरह दुनिया भर में कई लोग उनकी लिए खड़े हैं और लोकतंत्र और व्यक्तियों के अधिकारों को बढ़ावा देने के उनके शांतिपूर्ण प्रयासों का समर्थन करते हैं। ”

तियानमेन चौक पर प्रदर्शनकारियों की ओर टैंक को आने से रोकता एक आम चीनी नागरिक जिसे टैंकमैन का नाम दिया गया |
तियानमेन चौक पर प्रदर्शनकारियों की ओर टैंक को आने से रोकता एक आम चीनी नागरिक जिसे टैंकमैन का नाम दिया गया |

तियानमेन पर कब्जा करने वाले प्रदर्शनकारी न केवल राजनीतिक परिवर्तन चाहते थे, वे सरकार की अर्थव्यवस्था को संभालने और बढ़ते भ्रष्टाचार से भी निराश थे।

हांगकांग में Tiananmen Massacre के आयोजन पर रोक

इस नरसंहार की घटना को आमतौर पर हांगकांग में मनाया जाता है, वहां के विक्टोरिया पार्क में हजारों लोगों की भीड़ हर साल इसमें शहीद हुए लोगों के श्रद्धांजलि देकर याद करते थे | आखिरी बाद लोग 2019 में तियानमेन नरसंहार (Tiananmen Massacre) के लिए इकट्ठा हुए थे क्योंकि उसके बाद कोरोना महामारी आ गयी और उसकी आड़ में चीन ने हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर दिया।

इस राष्ट्रीय सुरक्षा कानून द्वारा हांगकांग (Hong Kong) में चीन का कानून सबसे सुप्रीम कानून होगा, इस पर वहां की स्थानीय सरकार का कोई कंट्रोल नहीं होगा. राज्य के अधिकारी इस कानून को लेकर किसी रोल में नहीं होंगे. इस कानून द्वारा अब हांगकांग में सीधे तौर पर चीन के कानूनों के हिसाब से काम होंगे

जिसके कारण ही इस साल तियानमेन नरसंहार (Tiananmen Massacre) पर कोई आयोजन होने से रोकने के लिए इलाके की पुलिस ने लोगों चेतावनी दी है, और शुक्रवार की रात को किसी को भी बाहर निकलने से रोकने के लिए इलाके की घेराबंदी कर दी।

तियानमेन स्क्वायर प्रदर्शनों का कारण

1989 में एक मुक्त विचार पार्टी के नेता हू याओबैंग की मौत के खिलाफ छात्रों ने थियानमेन चौक में प्रदर्शन शुरू किया था, जो देखते-देखते देश में लोकतंत्र की गुहार लगाने लगा। प्रदर्शनकारी जल्द ही भ्रष्टाचार को खत्म करने की मांग के साथ-साथ कम्युनिस्ट पार्टी को सत्ता से हटाने की भी मांग करने लगे।

आधिकारिक तौर पर इन प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी थीं। जिससे सत्ता में सुधारवादी और रूढ़िवादी लोगों के बीच इस बात को लेकर द्वंद होने लगा। पूरे चीन में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और हजारों लोग राजधानी बीजिंग में जमा होने लगे।

समाज में अफरा-तफरी का माहौल बनने के डर से रूढ़िवादी ताकतों ने देश में सैनिक शासन (Military rule) लागू कर दिया, लेकिन तियानमेन स्क्वायर (चौक) में प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा होती रही। 30 मई को छात्रों ने ‘लोकतंत्र की मूर्ति’ को स्थापित किया और हजारों लोगों ने तालियों के साथ इसका स्वागत किया। जिसके बाद कम्युनिस् पार्टी ने इसपर कार्रवाई करने का निश्चय किया।

सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को उतार दिया। इसके बाद सेना ने तबाही का जो आलम रचा वो आज भी लोगों की रूह कंपा देता है।

PLA आंदोलन कुचलने के लिए लोगों पर गोलियां और बम चलाने से भी नहीं चूकी। सड़कों पर टैंक उतार दिए गए और निहत्थे लोगों को रौंद दिया गया। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में 10 हजार लोगों मारे जाने की बात कही गई। हालांकि, चीन ने कभी भी मरने वालों की सही संख्या को सार्वजनिक नहीं किया।

यह घटना आज भी चीनी सरकार को इतनी डराती है कि उसने इस नरसंहार से जुड़े कंटेंट पर बैन लगा रखा है।

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