America करने जा रहा चीन के चिप उद्योग को बाधित

America: चीन पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका लगातार कोशिश में जुटा हुआ है. इसी कड़ी में शुक्रवार को बाइडेन प्रशासन ने आयात के नए नियम जारी कर दिए हैं. जानकार बता रहें हैं की, सेमीकंडक्टर चिप्स के उद्योग को बाधित कर ने से चीन को आर्थिक और सैन्य चोट पहुँचेगी.

चीन को चोट पहुँचाना चाहता है America

रायटर्स से मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिका (America) अब ऐसे नियस्म लाने जा रहा है जिससे चीन के सेमीकंडक्टर चिप्स के उद्योग को गहरी चोट पहुँचेगी. इस नियम की मदद से अमेरिका चीन की तकनीक और मिलिट्री के क्षेत्र की बढ़त को रोकना चाहता है.अमेरिका की मंशा है की ना सिर्फ वो बल्कि उसके सहयोगी देश भी चीन पर प्रतिबन्ध लगाना चालू कर दें.

वाशिंगटन डीसी स्थित थिंक-टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के एक प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ जिम लुईस ने कहा की, “यह नियम चीन को बुरी तरह से प्रभावित करेंगे. वैसे तो चीन चिपमेकिंग को छोड़ने वाला नहीं है.  लेकिन यह नियम उसकी रफ़्तार को धीमा कर देंगे.”

कुछ नियम तुरंत हो चुगे हैं लागू

अमेरिकी (America) उपकरणों से बने चिप्स के चीन से निर्यात करने को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी शक्तियों का विस्तार तथाकथित विदेशी उत्पाद नियम के रूप में हुआ है. इसे पहले अमेरिकी सरकार को चीनी टेलीकॉम दिग्गज हुआवेई टेक्नोलॉजीज कंपनी लिमिटेड को विदेशों में बने चिप्स के निर्यात को नियंत्रित करने के लिए नियम लागू किए गये थे.

कुछ नियम जो तुरंत लागू हो चुगे हैं. इस साल की शुरुआत में शीर्ष टूलमेकर KLA कॉर्प, लैम रिसर्च कॉर्प और एप्लाइड मैटेरियल्स इंक को नियमो का एक पत्र भेजा गया था. इस बारे में वरिष्ठ अधिकारीयों ने कहा है की, ” यह नियम विदेशी फर्मों द्वारा चीन को एडवांस चिप बेचने या उन्हें चिप बनाने के लिए टूल्स की सप्लाई से रोकता है.” आगे उन्होंने कहा की इस बात की हम अभी पुष्टि नहीं कर सकते की बाकी देश इस फैसले के लिए राजी होंगे या नहीं.

अमेरिकी कंपनी Apple भी अब चीन पर कर रही निर्भरता कम

अमेरिकी कंपनी Apple अब धीरे-धीरे चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है. कंपनी अब भारत में धीरे-धीरे अपना व्यापार बढ़ा रही है. रिपोर्ट्स की माने तो, लगभग 90 प्रतिशत Apple चीन पर निर्भर है. इन दिनों ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है. इसी तनाव के चलते अब अमेरिकी कंपनी ने यह फैसला लिया है.

सुरक्षा के लिहाज से भी यह फैसला ज़रूरी था. दूसरी तरफ चीन की जीरो कोविड निती व्यापार को ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. जानकारों की माने तो चीन से पहले ही कंपनियां अपना नाता ख़त्म करना चाहती थीं. लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते उनको इतना वक़्त लगा.

वहीँ बीते दिन अमेरिका ने चीन से संबंध रखने वाली ड्रोन कंपनी DJI को भी आड़े हांथो लिया है. DJI कंपनी पर ये आरोप लगा था की वो चीनी आर्मी को ख़ुफ़िया जानकारी साझा करती है.इस ड्रोन कंपनी में चीन की भी हिस्सेदारी है. जिसकी वजह से बाकी देशों की सुरक्षा खतरे में है. चीन पर अब अमेरिका लगभग हर तरीके से पकड़ बनाना चाहता है. ताइवान की वजह से वैसे भी चीन और अमेरिका के रिश्तों में खट्टास आ गयी है.

 

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