America: अमेरिकी अधिकारी ने चीन की आलोचना , कहा की चीन में अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहें हैं हमले

अमेरिकी(America) विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन(Antony Blinken) ने एक बार फिर भारत, चीन और इरान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की है. उन्होंने ने सबसे ज्यादा चीन की आलोचना की है. ब्लिंकेन ने कहा आमतौर पर दुनिया में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर खतरे बढ़े हैं. भारत के बारे में ब्लिंकेन ने कहा, “जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और विशाल धार्मिक विविधता का घर है, उस भारत में हमने धर्मस्थलों में लोगों पर हमलों में वृद्धि देखी है.”

धार्मिक स्वतंत्रता की वार्षिक रिपोर्ट क्यों है चिंता जनक

अमेरिकी(America) विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने सबसे तीख़े कटाक्ष चीन पर किए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन(Joe Biden) के पदभार ग्रहण करने से एक दिन पहले, वाशिंगटन ने घोषणा की कि उसने निर्धारित किया है कि बीजिंग शिनजियांग के पश्चिमी प्रांत में उइगरों के खिलाफ “नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध” कर रहा है. जहां अधिकार समूहों और गवाहों ने कहा है कि दस लाख से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है. इसके साथ ही चीनी सरकार ने शिनजियांग में उइगर और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए शर्तों के बारे में “निंदा करने वाले हमलों” की निंदा करते हुए दुर्व्यवहार के आरोपों को खारिज कर दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को 2021 अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट का अनावरण करते हुए संवाददाता सम्मेलन में कहा, “चीन मुख्य रूप से मुस्लिम उइगर और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों का नरसंहार और दमन जारी रखता है.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन(Antony Blinken) ने इसके आगे कहा की “अप्रैल 2017 से, शिनजियांग में दस लाख से अधिक उइगर, जातीय कज़ाख, किर्गिज़ और अन्य लोगों को नजरबंदी शिविरों में हिरासत में लिया गया है” राज्य विभाग की रिपोर्ट ने चीनी सरकार पर “धार्मिक अनुयायियों की गतिविधियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर नियंत्रण करने और प्रतिबंधित करने का आरोप लगाया, जिसे इसे राज्य या [चीनी समुदाय पार्टी] के हितों के लिए खतरा माना जाता था.”

भारत के परिपेक्ष में क्या है धार्मिक स्वतंत्रता की वार्षिक रिपोर्ट

अमेरिकी(America) विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन(Antony Blinken) ने दुनियाभर में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के हनन के बीच भारत में पूजा स्थलों पर लोगों पर ‘बढ़ते’ हमलों का हवाला देते हुए चिंता प्रकट की. अमेरिकी(America) विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आगे बढ़कर भारतीय अधिकारियों पर इन हमलों को ‘अनदेखा या समर्थन करने’ का आरोप लगाया. उन्होंने न तो किसी अधिकारी का नाम बताया और न ही घटनाओं का कोई विशेष उल्लेख किया. उनकी टिप्पणी दुनियाभर में धर्म की स्वतंत्रता की स्थिति पर विदेश विभाग की 2021 की वार्षिक रिपोर्ट के विमोचन के समय आई है. रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उइगर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के दमन के लिए चीन, रोहिंग्याओं के इलाज के लिए म्यांमार और पाकिस्तान द्वारा पारित कठोर ईशनिंदा कानून, जिसमें मौत की सजा का प्रावधान है, के निरंतर उपयोग का जिक्र किया गया है.

ब्लिंकन ने कहा, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में विभिन्न प्रकार की आस्थाओं के घर हैं, हमने पूजा स्थलों पर लोगों पर हमले बढ़ते देखे हैं.” उन्होंने उन्हें निर्दिष्ट नहीं किया, लेकिन 2000-पृष्ठ की रिपोर्ट ने संकेत दिया कि ये हमले ईसाई और मुस्लिम पूजा स्थलों पर किए गए. इस रिपोर्ट में अमेरिका(America) ने भारत में ऐसे कानूनों की ओर संकेत किया है जो धर्म परिवर्तन पर पाबंदियां लगाते हैं. रिपोर्ट में मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा ऐसे उदाहरण दिए गए हैं जबकि उनके साथ धर्म के नाम पर भेदभाव हुआ. रिपोर्ट कहती है, “नेताओं ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणियां की हैं या सोशल मीडिया पर लिखा है.” भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू-राष्ट्रवादी सरकार ने ऐसे कई कानून बनाए हैं जिन्हें मानवाधिकार कार्यकर्ता और आलोचक भेदभावकारी बताते हैं.



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