September 26, 2022
वहां के सरकार ने कोई ठोस आर्थिक कदम नहीं उठाये तो श्रीलंका की ही नौबत आ सकती है | पाकिस्तान मीडिया के अनुसार 11 बिलियन डॉलर में 9 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा चीन , सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तानी स्टेट बैंक में राखी गयी थी | जिसका मतलब ये है कि ये पैसा कभी भी इन देशों द्वारा माँगा जा सकता है |
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श्रीलंका में पिछले कुछ महीने से हालात भयावह हैं. भारत के दक्षिण में मौजूद देश में दूध, दवाइयां, पानी, फल, सब्जियां समेत जरूरत की चीजों की जबर्दस्त किल्लत हो गई है. रोजमर्रा के सामान के दाम आसमान छू रहे हैं और आटा-चावल-दाल की कीमत आम लोगों की पहुंच से दूर हो चुकी है | श्रीलंका अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. श्रीलंका की मौजूदा कंगाली की हालत के पीछे टैक्‍स कटौती, पर्यटन इंडस्‍ट्री का धराशायी होना सबसे बड़ी वजह है. श्रीलंका पर फरवरी तक 12.55 अरब डॉलर का कर्ज था जिसमें से करीब 4 बिलियन उसे इसी साल चुकाना है.

श्रीलंका के सामने आजादी के बाद का सबसे गंभीर संकट पैदा हो गया है. यह आर्थिक संकट कितना बड़ा है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि श्रीलंका में महंगाई की दर 17 फीसदी को भी पार कर चुकी है. श्रीलंकाई रुपये की वैल्यू पिछले कुछ दिनों में डॉलर के मुकाबले 46 फीसदी से अधिक घटी है. मार्च में श्रीलंका में 1 डॉलर की कीमत 201 श्रीलंकाई रुपये थी जो अब 318 श्रीलंकाई रुपये पर आ चुकी है.

पाकिस्तान की भी आर्थिक हालत उसी राह पर

पिछले दिनों पाकिस्तान में इमरान खान के खिलाफ नेशनल असेंबली (पाकिस्तान की लोकसभा ) में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद नये प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के छोटे भाई शाहबाज़ शरीफ बने है | पाकिस्तान का राजनीतिक संकट भले ही खत्म हो गया है पर आर्थिक संकट लगातार बढ़ता जा रहा है |

रूस और यूक्रेन वॉर युद्ध के कारण दुनिया में कच्चे तेलों के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है | जिससे तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है , पाकिस्तान भी उनमे से ही है | एक तो पहले से देश दूसरे देशों और IMF के कर्जों से चल रहा है ऊपर से तेल के दामों लगातार बढ़ोतरी से पाकिस्तान में बैलेंस ऑफ़ पेमेंट की समस्या हो गयी है |

इमरान खान (PTI ) की पिछली सरकार ने अपने आखिरी दिनों में जनता को महगाई से राहत देने के लिए पेट्रोल के दामों में 10 पाकिस्तानी रूपये की कटौती की थी |इमरान खान सरकार की पिछली सरकार ने अपने आखिरी दिनों में जनता के बीच अपने प्रति विरोध को कम करने के लिए पेट्रोल के दामों में 10 पाकिस्तानी रूपये की कटौती की थी | जिसका भार नयी सरकार को उठाना पड़ रहा है | एक तो पाकिस्तान के पास पर्याप्त डॉलर की कमी है महंगा तेल आयात करने के लिए ऊपर से ख़रीदे हुए तेल पर जनता को सब्सिडी भी देनी पड़ रहीं है | जिसके कारण पाकिस्तान और सकंट में फंसता जा रहा है |

अब और क्या होगा ?

पाकिस्तान के पास अभी 11 बिलियन डॉलर विदेशी मुद्रा है | जो उसके सिर्फ 2 महीने के आयात बिल के भुगतान के लिए बचे है | अगर वहां के सरकार ने कोई ठोस आर्थिक कदम नहीं उठाये तो श्रीलंका की ही नौबत आ सकती है | पाकिस्तान मीडिया के अनुसार 11 बिलियन डॉलर में 9 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा चीन , सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तानी स्टेट बैंक में राखी गयी थी | जिसका मतलब ये है कि ये पैसा कभी भी इन देशों द्वारा माँगा जा सकता है |

पाकिस्तान ने दुनिया भर के देशों से कर्जा लिया हुआ है उन कर्जों को भी वापस करना है | जिससे ये बात तो साफ़ है की आने वाले दिन वहां की सरकार के लिए आसान नहीं है |

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