September 29, 2022
Afghanistan में तालिबान के कब्ज़े के बाद बढ़ा अपराध

Afghanistan में तालिबान के कब्ज़े के बाद बढ़ा अपराध

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Afghanistan: देश में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान (Afghanistan) में बढ़ती अपराध दर के बीच, एक और घटना सामने आई है. जब सशस्त्र लुटेरों ने हाल ही में बल्ख प्रांत की राजधानी मजार-ए-शरीफ में एक बुजुर्ग कैब चालक की कार लूटने के बाद उसकी हत्या कर दी है.

64 वर्षीय व्यक्ति का हुआ था अपहरण

खामा प्रेस के अनुसार, 64 वर्षीय व्यक्ति का हथियारबंद लोगों ने अपहरण कर लिया था. जब वह 19 अगस्त को अपनी कैब चला रहा था और अगली सुबह उसका शव मजार-ए-शरीफ के पुलिस जिले 10 में मिला था.

इससे पहले, पूर्वी अफगान प्रांत नंगरहार में एक विश्वविद्यालय के व्याख्याता की जलालाबाद शहर में लुटेरों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी.  जबकि 5 अगस्त को चार लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया था.

तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से अफगानिस्तान (Afghanistan) वर्तमान में बेरोजगारी और गरीबी की उच्चतम दर का अनुभव कर रहा है और तब से अपराध दर में भी वृद्धि हुई है. खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बदले में, इसने हत्याओं, आत्महत्याओं और पारस्परिक विवादों में वृद्धि की है. बता दें की, अफ़ग़ानिस्तान वर्तमान में एक गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है, अंतर्राष्ट्रीय आकलन के अनुसार, 23 मिलियन से अधिक को सहायता की आवश्यकता है.

मानवाधिकारों की स्थिति हुई खराब

इसके अलावा, पिछले साल अगस्त में अफगान सरकार के पतन और तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति खराब हो गई है. यद्यपि देश में लड़ाई समाप्त हो गई है. गंभीर मानवाधिकारों का उल्लंघन बेरोकटोक जारी है. खासकर महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ है.

देश से अमेरिकी सेना की वापसी के साथ, देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा करने वाले बड़े पैमाने पर हिंसा शुरू हो गई है. UNAMA के अनुसार, कम से कम 59 प्रतिशत आबादी को अब मानवीय सहायता की आवश्यकता है. 2021 की शुरुआत की तुलना में 6 मिलियन लोगों की वृद्धि हुई है.

काबुल में चल रहे आर्थिक संकट ने कई क्षेत्रों में घोर गरीबी पैदा कर दी है. विश्लेषकों के अनुसार, गरीबी में वृद्धि का प्राथमिक कारण राजनीतिक परिवर्तन है. इसके अलावा, देश में तालिबान शासन के बाद, कई निजी व्यवसायों ने काम करना बंद कर दिया है और साथ ही देश को और भी अधिक प्रभावित किया है.

तालिबान शासन में बढ़ी चुनौतियाँ

अधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जबसे अफगानिस्तान में तालिबान ने कब्ज़ा किया है तबसे वो आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. विश्लेषकों की राय है कि अफगानिस्तान आज भी राजनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक रूप से उतना ही अस्थिर है.

बताया जा रहा है की, तालिबान के राज में अफगानिस्तान का आर्थिक संकट और गहराया है. इससे देश में आज अकाल जैसी हालत है। इस बीच देश में अलग-अलग गुटों के उभरने के भी संकेत हैं. इससे तालिबान की सत्ता को चुनौती मिल रही है.

महिलाओं पर भी जुर्म बढ़ गए हैं. पर्यवेक्षकों का कहना है कि हालिया हमलों ने तालिबान नेतृत्व के इस दावे को गलत साबित कर दिया है कि आईएसआईएस-के का देश में खात्मा कर दिया गया है.

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