September 25, 2022
Afganistan Crisis: गंभीर कर्ज संकट से जूझ रहा है अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान का 28 मिलियन डॉलर का कर्ज बकाया

Afganistan Crisis: गंभीर कर्ज संकट से जूझ रहा है अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान का 28 मिलियन डॉलर का कर्ज बकाया

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भारत के सभी पड़ोसी देश इस वक़्त मुसीबत का सामना कर रहें हैं. कई देशो की आर्थिक स्थिति सही नहीं है. उसमें से एक है अफगानिस्तान (Afganistan Crisis:)

अफगानिस्तान (Afganistan Crisis) एक आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और जब से तालिबान ने देश पर नियंत्रण किया है तब से वह कर्ज में डूबा हुआ है क्योंकि उसपर ताजिकिस्तान पर बिजली के लिए 28 मिलियन अमरीकी डालर का बकाया है.

अफगानिस्तान की आर्थिक हालत है दयनीय

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान (Afganistan Crisis) आर्थिक मुसीबत का सामना कर रहा है. और जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्ज़ा हुआ है तब से अफगानिस्तान की हालत दिन पर दिन बत्तर होती जा रही है.

ताजिकिस्तान की राष्ट्रीय बिजली कंपनी बरकी तोजिक के प्रमुख मोहम्मद उमर असुजादा ने कहा कि अफगानिस्तान के दा अफगानिस्तान ब्रेशना शेरकट (डीएबीएस) पर बिजली के लिए 28 मिलियन अमरीकी डालर का बकाया है.

खामा प्रेस ने बताया कि, 1 अगस्त को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ताजिक ऊर्जा अधिकारी ने कहा कि डीएबीएस कंपनी से बरकी तोजिक को पैसा ट्रांसफर करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था. क्योंकि बिजली खरीदने के लिए जिम्मेदार बैंकों को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था.

डीएबीएस द्वारा किया जाना है भुगतान

जानकारी के लिए बता दें की, असुजादा का कहना है की, “हमें 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर नकद प्राप्त हुए हैं.  हालांकि, बकाया राशि 28 मिलियन अमेरिकी डॉलर है जिसका भुगतान डीएबीएस द्वारा किया जाना है.”

इसके आगे असुजादा ने कहा है की, “अफगान कंपनी डीएबीएस इस मामले पर काम कर रही है.” खामा प्रेस ने बरकी तोजिक के एक वरिष्ठ अधिकारी का हवाला देते हुए बताया कि, “ताजिकिस्तान ने वर्ष की पहली छमाही के दौरान अफगानिस्तान को 734 मिलियन kWh से अधिक बिजली प्रदान की है”

हाल के वर्षों में अफगान ट्रांसमिशन लाइनों के विनाश के कारण, अफगानिस्तान ने कभी-कभी बिजली के प्रावधान में रुकावटों का अनुभव किया. हालांकि, उज़्बेक ऊर्जा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, अफगानिस्तान ने बिजली के आयात के लिए उज़्बेकिस्तान को अपने पर्याप्त ऋण का भुगतान किया है.

तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण के बाद किए ये बदलाव

बता दें की, अगस्त के मध्य में जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण किया है.  देश में कई बिजली आपूर्ति परियोजनाओं को रोक दिया गया है और कई बंद भी हो गए हैं. इन परियोजनाओं को रोकने का मुख्य कारण एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक और संयुक्त राज्य अमेरिका की अफगानिस्तान को विकास सहायता का निलंबन है.

चार दशकों के संघर्ष, भयंकर सूखे और महामारियों के कारण अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमरा रही थी. अमेरिकी सैनिकों की जल्दबाजी में वापसी के बाद तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने अफगानिस्तान की संपत्ति को फ्रीज कर दिया और मदद रोक दी है.

इसके अलावा, तालिबान के नियंत्रण में आने के बाद से महिलाएं काम करती हैं. और विशेष रूप से महिला कमाने वाली महिलाओं ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष किया है. सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों को वर्तमान में अधिकांश मामलों में रखा जाता है. जानकारों का कहना है की, अफगनिस्तान में हालात इतनी जल्दि नहीं सुधरेंगे.

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