Afganistan की 97 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे कर रही जीवन यापन

Afganistan: तालिबान ने पिछले साल अफगानिस्तान (Afganistan) पर कब्ज़ा कर लिया था. जिसके बाद से अफगानिस्तान अर्थव्यवस्था गहरे संकट से गुजर रहा है. अधिकारिक रिपोर्ट्स की माने तो अफगानिस्तान की 97 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे चली गई है. एशियाई देशों पर इस वक़्त संकट के गहरे बादल छाए हुए हैं.

Afganistan का हाल है बेहाल

स्थाई मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, सर्वे के अनुसार, सूखे और खराब शासन के परिणामस्वरूप अफगानिस्तान (Afganistan) की आधी से अधिक आबादी द्वारा भोजन की गंभीर कमी का अनुभव किया जा रहा है. जिसका उनकी आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. बताया जा रहा है की, अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद से और भी अर्थव्यस्था पटरी से नीचे उतर गई है.

टोलो न्यूज़ के मुताबिक, सर्वे में कहा गया है की, “लगभग 60 प्रतिशत आबादी जलवायु आघात से पीड़ित है.” कृषि, सिंचाई और पशुधन मंत्रालय द्वारा अफगानिस्तान की खराब गेहूं आपूर्ति के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई है.

बुनियादी ढांचे पर दिखाई दिया है बड़ा असर

मंत्रालय के एक अधिकारी मोहम्मद कासिम ओबैदी ने कहा की, “हम अफगानिस्तान (Afganistan) में जलवायु परिवर्तन के साथ सालाना 4.7 से 5 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन कर रहे हैं.” टोलो न्यूज़ ने बताया कि IOM के अनुसार, अफगानिस्तान के बुनियादी ढांचे पर प्रमुख शहरों में बड़ा असर दिखाई दिया है. बिजली कटौती के चलते कई कारखाने बंद हो गए हैं. जिसकी वजह से कई लोग बेरोजगार हो गए हैं.

Afganistan की 97 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे कर रही जीवन यापन
Afganistan की 97 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे कर रही जीवन यापन

इस बीच, विश्व खाद्य कार्यक्रम ने भी अफगानिस्तान (Afganistan) में आर्थिक संकट को लेकर चिंता जताई है. डब्ल्यूएफपी (WFP) ने ट्विटर पर लिखा है की, “आर्थिक संकट ने पूरे अफगानिस्तान में नौकरियों, वेतन और आजीविका को खत्म कर दिया है. परिवारों और समुदायों को खुद का समर्थन करने में मदद करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है.”

सबसे ज्यादा छोटे उद्यमों को हुआ है नुकसान

अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते संकट ने छोटे उद्यमों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है. और निजी कंपनियों ने बिक्री में कमी और उत्पादों की उपभोक्ता मांग में भारी गिरावट के कारण अपने आधे से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. इसके अलावा, लाखों अफगान भुखमरी के कगार पर हैं. क्योंकि देश मानवीय संकट से जूझ रहा है.

बता दें की, तालिबान द्वारा अमेरिकी सैनिकों की जल्दबाजी में वापसी के बाद सत्ता पर कब्जा करने के बाद, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने अफगानिस्तान की संपत्तियों को सील कर दिया और मदद रोक दी है.

पिछले साल इतने लोग हुए थे बेरोजगार

खामा प्रेस ने बताया की, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, 2021 की तीसरी तिमाही में 500,000 से अधिक अफगान श्रमिकों ने अपनी नौकरी खो दी थी. और आने वाले वर्ष में तालिबान के नियंत्रण के बाद से अपनी नौकरी खोने वाले लोगों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है.

बीते कुछ महीनों में संयुक्त राष्ट्र के निकाय ने अनुमान लगाया था कि अफगानिस्तान की वास्तविक जीडीपी 13.2% तक कम हो सकती है. जिससे गरीबी दर में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है.

संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव और एशिया और प्रशांत क्षेत्र के क्षेत्रीय ब्यूरो के यूएनडीपी (UNDP) निदेशक कन्नी विघ्नराजा ने कहा था की, “हम मानवीय और आर्थिक संकटों के शीर्ष पर पूर्ण विकास पतन का सामना कर रहे हैं.”

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